‘भय’ ‘Fear’

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भय के ख़याल

Imagination of Fear

॰॰॰

Fear of unknown is actually
Fear of ‘known’ about unknown?
… that ‘known’ is our imagination
हमारे ख़याल
॰॰॰
शेर ने मुझे कभी खाया नहीं
इसलिए मुझे उससे भय है
भय शेर के काटने से नहीं
शेर के काटने के ख़याल से
॰॰॰
गाड़ी ने मुझे कभी कुचला नहीं
इसलिए मुझे उससे भय है
भय गाड़ी से कुचले जाने से नहीं
कुचले जाने के ख़याल से
॰॰॰
छत से मैं कभी नीचे गिरा नहीं
इसलिए मुझे उससे भय है
भय ऊँचाई से गिरने से नहीं
ऊँचाई से गिरने के ख़याल से
॰॰॰
मौत ने मुझे अभी तक उठाया नहीं
इसलिए मुझे उससे भय है
भय मौत के ख़ौफ़ से नहीं
मौत के ख़ौफ़नाक ख़याल से
॰॰॰
॰॰॰
आदमी रहता है ख़यालों की हक़ीक़त में
जिस दिन आदमी ख़याल छोड़
हक़ीक़त में जीना शुरू कर देगा
उस दिन उसका भय उसको छोड़ देगा
॰॰॰
॰॰॰
ततैया ने मुझे बहुत है काटा
हक़ीक़त में, ख़यालों में नहीं
इसलिए मुझे उससे भय नहीं
॰॰॰
ग़रीबी ने पाँव तले कुचला है मुझे
हक़ीक़त में, ख़यालों में नहीं
इसलिए मुझे उससे भय नहीं
॰॰॰
आदमीं के गिरने से मैं वाक़िफ़ हूँ
हक़ीक़त में, ख़यालों में नहीं
इसलिए मुझे उससे भय नहीं
॰॰॰
ज़िंदगी रोज़ जो रौंदती है मुझे
हक़ीक़त में, ख़यालों में नहीं
इसलिए मुझे उससे भय नहीं
॰॰॰
॰॰॰
®️©️
रो:हित
॰॰॰
I Salute to Life in Real, in action, not in thoughts or imaginations!
॰॰॰

6 thoughts on “‘भय’ ‘Fear’

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